लोग पूछ रहे हैं कि मैने गले में सर्वाइकल कॉलर क्यों पहना है....
कभी कभी सोचता हूँ कि ये गर्दन की (सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस) की बीमारी मुझे ही क्यों हुई ???
शायद गर्दन झुकना नहीं जानती-इसीलिए...या फिर इधर उधर बहुत घूमती थी-इसलिए.
कारण अनेक हो सकते हैं. ..खैर..
पिछले दिनों कई लोगों की गर्दनें देखने का मौका मिला...भाँति भाँति की गर्दनें- कुछ लंबी सुराहीदार, कुछ मोटी गैंडे की तरह, कुछ न्योता देती, कुछ दूर भगाती और कुछ तो दिखाई ही नहीं देती- ऐसा लगता है जैसे धड़ के ऊपर सर रख दिया गया हो...बीच में कुछ नहीं.- लेकिन अधिकतर लचीली और झुकने को तैयार..। कुछ गर्दनें झुकने से कुछ ज़्यादा भी करने को तैयार...गर्दन के नीचे खुले बटन, कहीं डराने के लिए..कहीं लुभाने के लिए. हर केस में- जितने ज़्यादा खुले बटन, उतनी प्रगति.
और कुछ मेरी तरह-भद्दी सी.. धूप और पसीने में लथपथ घमौंरियों से भरी हुई..काली चीकट...पर अकड़ी हुई गर्दनें. न नीचे खुले बटन..न लचीलापन.
ऐलान किया गया है- ऐसी किसी गर्दन को खुला न छोड़ा जाए....या तो अकड़ निकालने के लिए पट्टा पहनाया जाए या फिर .....काट दिया जाए.
मेरी गर्दन अभी कटी नहीं है.
Wednesday, 25 April 2007
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1 comment:
chaliye kariye intazar gardan katne ka...
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